दिवाली के अर्थ, परंपराओं, मिठाइयों और सजावट के बारे में पूरी जानकारी। मुहूर्त, अमावस्या तिथि का महत्व और भारत में इस रोशनी के त्योहार को मनाने का सुंदर तरीका। दिवाली के अर्थ, परंपराओं, मिठाइयो
दिवाली 2026: रोशनी, खुशियों और नए शुरुआत का त्योहार
दिवाली आने ही वाली है! हर तरफ रौनक, रोशनी और खुशी का माहौल है। बाज़ार सज चुके हैं, घरों की सफाई चल रही है और सब लोग इस रोशनी के त्योहार का इंतज़ार कर रहे हैं। यह वही समय है जब दीये जलते हैं, मिठाइयों बनती हैं और परिवार एक साथ मिलकर खुशियों मनाते हैं।दिवाली 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। 2026 में अमावस्या तिथि दिन रविवार 8 अक्टूबर शाम 05:30 बजे से लेकर रात 08:15 बजे तक लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। चूंकि अमावस्या आरम्भ तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे से अमावस्या तिथि का समापन: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजेइसलिए मुख्य दिवाली और लक्ष्मी पूजा दिन रविवार 8 अक्टूबर 2026 को होगी।इस दिन के शुभ समयः
लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त: शाम 06:27 बजे से 08:27 बजे तक (अवधि: 2 घंटे)
प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से रात 08:34 बजे तकपंचांग के अनुसार, शुभ कार्य और स्थिर लक्ष्मी के आगमन के लिए वृषभ लग्न सबसे अच्छा माना जाता है, जो 08:27 PM तक रहेगा इसीलिए इन्हीं समयों में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
दिवाली पर अमावस्या का महत्व
दिवाली की रात अमावस्या होती है, यानी चाँद नहीं दिखता लेकिन दीयों की रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठता है। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान राम रावण को हराकर और 14 साल का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में पूरे शहर में दीये जलाए गए, और तभी से दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अंधकार कितना भी गहरा हो, प्रकाश हमेशा जीतता है।दिवाली का अर्थ और परंपराएँ
दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं है यह नई शुरुआत, कृतज्ञता और परिवार के साथ समय बिताने का मौका है। लोग इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा करते हैं ताकि घर में धन, सुख और समृद्धि बनी रहे। घर साफ किए जाते हैं, फूलों और रंगोली से सजाए जाते हैं। दीये जलाकर नकारात्मकता को दूर किया जाता है और घर में सकारात्मकता का स्वागत किया जाता है। लोग मिठाइयाँ बाँटते हैं, उपहार देते हैं और साथ में जश्न मनाते हैं।भारत में दिवाली कैसे मनाई जाती है
भारत के हर कोने में दिवाली का रंग अलग होता है: उत्तर भारत में इसे भगवान राम की वापसी के रूप में मनाया जाता है। पश्चिम भारत में लक्ष्मी पूजा का खास महत्व होता है।
पूर्वी भारत में इसे काली पूजा के रूप में मनाया जाता है।
हर जगह घरों में दीये जलाए जाते हैं, मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं और लोग नए कपड़े पहनकर त्योहार का मज़ा लेते हैं।
उत्तर भारत में इसे भगवान राम की वापसी के रूप में मनाया जाता है।
पश्चिम भारत में लक्ष्मी पूजा का खास महत्व होता है।
पूर्वी भारत में इसे काली पूजा के रूप में मनाया जाता है।
हर जगह घरों में दीये जलाए जाते हैं, मिठाइयों बाँटी जाती हैं और लोग नए कपड़े पहनकर त्योहार का मज़ा लेते हैं।
अब बहुत से लोग इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने लगे हैं कम पटाखे, मिट्टी के दीये और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाने वाली सजावट।
दिवाली की मिठाइयाँ
दिवाली मिठाइयों के बिना अधूरी है। घर-घर में लड्डू, बर्फी, काजू कतली, चकली, नमकीन जैसी चीजें बनती हैं। इनका स्वाद तो अच्छा होता ही है, पर इन्हें मिल-बाँटकर खाने का मज़ा सबसे अलग होता है।सजावट और रंगोली
दिवाली पर घर की सजावट बहुत खास होती है। लोग रंगोली, फूलों, दीयों और लालटेन से अपने घर को सजाते हैं। अब कई लोग LED लाइट्स और पर्यावरण-अनुकूल सजावट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि घर सुंदर भी लगे और सुरक्षित भी रहे।पर्यावरण-अनुकूल दिवाली
आजकल लोग पटाखों के बजाय मिट्टी के दीये जलाकर और कम प्रदूषण वाले तरीकों से दिवाली मनाने लगे हैं। यह पर्यावरण की रक्षा करने के साथ-साथ त्यौहार को और अर्थपूर्ण बनाता है।▲ दिवाली की प्रार्थना और संदेश
दिवाली हमें सिखाती है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर, और प्रकाश हमेशा अंधकार पर जीतता है। यह समय है पुराने गुस्से को छोड़ने, नई शुरुआत करने और दूसरों के साथ खुशियाँ बाँटने का।दिन रविवार 8 अक्टूबर 2026 को जब आपके घर में दीये जलें, तो याद रखिए-
सच्ची रोशनी वही है जो आपके दिल में जलती है।
यह दिवाली आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि लेकर आए यही कामना है।

