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Independence Day: हमारा देश आजाद कैसे हुआ? जानिए पूरी सच्चाई

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Independence Day: हमारा देश आजाद कैसे हुआ? जानिए पूरी सच्चाई कोई कहता है कि हमारा देश महात्मा गांधी की वजह आज़ाद हुआ तो कोई कहते हैं सुभाष चंद्र बोस और कोई पंडित जवाहरलाल नेहरू की वजह से आजाद हुआ ऐसा कहते हैं लेकिन हमारा देश आजाद होने के पीछे असल वजह क्या है आइए आज के इस लेख में जानते हैं - 

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  हमारे पूरे देश को आजाद करना इतना आसान नहीं था जितना कि हमें लगता है हमारा देश आजाद करने के लिए कई वीर जवानों ने अपना बलिदान दिया है। कई तरह की आलोचना को सहन किए है।

अंग्रेजों का भारत में आगमन 

जैसा कि हमें पता है कि 17वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से व्यापार करने के लिए आए थे उसके बाद se ही अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा जमा लिया था। 17 सी सदी के बाद से भारत पर अंग्रेजों का शासन चलने लगा। ईस्ट इंडिया कंपनी पर ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। पूरे भारत पर अंग्रेजों की हुकूमत चलने लगी।

भारत आजाद कैसे हुआ?

पूरे भारतीय अंग्रेजों के शासन से परेशान थे। भारतीय लोग अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। 17वीं सदी से लेकर 19वीं सदी तक ब्रिटिश शासको का शासन चलता रहा। 
 

  एक लंबे समय और संघर्ष के बाद भारत के नागरिकों ने स्वतंत्रता आंदोलन निकाला जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय अधिकारो को प्राप्त करना था। दरअसल स्वतंत्रता आंदोलन के परिणाम स्वरुप ही हमारे देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली।

गांधी जी का नेतृत्व -

गांधी जी ने ब्रिटिश वस्तु का बहिष्कार किया और भारतीय वस्तुओं को अपनाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। गांधी जी ने नमक आंदोलन भी चलाया ताकि भारतीय इंडिया का नमक इस्तेमाल कर सके।

स्वतंत्रता आंदोलन -

हमारे देश की आजादी का प्रमुख कारण स्वतंत्रता आंदोलन ही था जिसमें ब्रिटिश शासको के खिलाफ प्रदर्शन जारी किए गए। इस स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने नारे बोलकर अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन किया। 

बलिदान और क्रांति -

1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद से ही भारत पर अंग्रेज़ों का शासन था।
हालाँकि, 1857 के विद्रोह के दौरान उन्हें पहली बार कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे जैसे नाम अंग्रेज़ों के लिए डर का कारण बन गए।
20वीं सदी में, यह आंदोलन और मज़बूत हुआ।

- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने "इंकलाब ज़िंदाबाद" का नारा लगाया।

- सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेज़ों को सीधे चुनौती देने के लिए 'आज़ाद हिंद फ़ौज' का गठन किया।

- चंद्रशेखर आज़ाद ने आखिरी गोली खुद खाई, लेकिन वे पकड़े नहीं गए।

इन क्रांतिकारियों ने साबित कर दिया कि भारतीय अब डरते नहीं थे।
हर फाँसी के बाद, हज़ारों नए लोग आंदोलन से जुड़ते गए।

गांधी जी का अहिंसक आंदोलन - 'जनता की शक्ति'

महात्मा गांधी ने लड़ाई लड़ने का तरीका ही बदल दिया।
उन्होंने बंदूकों की जगह चरखे को और हिंसा की जगह सत्याग्रह को अपनाया।

कुछ प्रमुख आंदोलन इस प्रकार हैं:

- असहयोग आंदोलन 1920: सरकारी नौकरियों, स्कूलों और अदालतों का बहिष्कार।

- नमक सत्याग्रह (डांडी मार्च) 1930: नमक कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध, जिसमें लोगों ने अपना नमक खुद बनाया। 

- भारत छोड़ो आंदोलन 1942: पूरे देश में "भारत छोड़ो" का नारा गूंज उठा, जिसमें ब्रिटिश शासन को खत्म करने की मांग की गई।

गांधी जी के नज़रिए ने लोगों को एकजुट किया और उन्हें आज़ादी के लिए लड़ने की ताकत दी।

भारत पाक विभाजन

ब्रिटिश सरकार ने भारत को भारत और पाकिस्तान दो अलग देश में विभाजन किया। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम जो कि ब्रिटिश संसद में 1947 में पारित किया गया था उसके बाद ही 15 अगस्त 1947 को मध्य रात्रि में हमारा देश भारत आजाद हुआ।

स्वतंत्रता दिवस 

स्वतंत्रता दिवस , भारत में , 15 अगस्त को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला राष्ट्रीय अवकाश है। स्वतंत्रता दिवस 1947 में ब्रिटिश राज के अंत का प्रतीक है , जो उस वर्ष 18 जुलाई के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा लाया गया था , और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लंबे संघर्ष के बाद एक स्वतंत्र और स्वाधीन भारतीय राष्ट्र की स्थापना का प्रतीक है। यह भारत के दो देशों, भारत और पाकिस्तान , में विभाजन की वर्षगांठ का भी प्रतीक है , जो 14-15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को हुआ था। 

भारत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, जबकि पाकिस्तान इसे 14 अगस्त को उस तिथि के सम्मान में मनाता है जिस दिन वहां औपचारिक रूप से स्वतंत्रता की घोषणा की गई थी।

अंग्रेजों ने मध्य रात्रि में ही भारत क्यों छोड़ा?

ब्रिटिश शासन को के द्वारा मध्य रात्रि में भारत को छोड़ने की मुख्य वजह भारतीयों के द्वारा जो स्वतंत्रता आंदोलन चलाया गया था भारत की स्वतंत्रता की एक फिक्स डेट थी और वह थी 15 अगस्त 1947 की। इसलिए ब्रिटिश शासको ने इस समय से पहले भारत छोड़ दिया।

भारतीय ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारत छोड़ो आंदोलन चलाया। इस वजह से ब्रिटिश प्रशासन ने अपने अभियान को बंद किया और अपनी सेवा को वापस बुलाया। भारत-पाकिस्तान के विभाजन के दौरान कई तरह के स्वतंत्रता आंदोलन चले जिस दौरान ब्रिटिश शासको के द्वारा अपनी चुनौतियों वापस लेनी पड़ी और इस तरह से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के परिणाम स्वरूप ब्रिटिश शासको को भारत छोड़ना पड़ा और भारत का एक नया अध्याय शुरू हुआ।  

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