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तलाक, धोखाधड़ी जैसी चीजें आजकल बहुत आम हैं। एक अच्छा पार्टनर ढूंढना बहुत बड़ी बात है इसके लिए आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने आपके सवाल का जवाब दिया है।
अगर आप भी शादी करने या न करने को लेकर असमंजस में हैं तो यह आर्टिकल आपके काम आ सकता है।
विवाह क्या है?
विवाह एक सामाजिक व्यवस्था है जिसमें दो लोग जीवन भर साथ रहने और एक परिवार शुरू करने का निर्णय लेते हैं। वे कानूनों, नियमों, रीति-रिवाजों, विश्वासों और प्रथाओं के माध्यम से एक-दूसरे को स्वीकार करते हैं।विवाह का उद्देश्य क्या है?
शादीशुदा जिंदगी में दो लोग एक-दूसरे से बंधे होते हैं। हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने के वादे के साथ। एक-दूसरे की कमियों को छोड़कर एक-दूसरे के साथ जिंदगी गुजारते हैं। लेकिन हिंदू धर्म में शादी को सिर्फ एक जन्म का नहीं बल्कि सात जन्मों का माना जाता है। शादी में सात जन्म होते हैं।शादी महत्वपूर्ण नहीं है
श्री श्री रविशंकर का कहना है कि खुश रहना शादी करने और परिवार शुरू करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर आपको लगता है कि आप किसी से शादी करके खुश रह सकते हैं, तो हर हाल में शादी करें। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि आप अकेले अधिक खुश रह सकते हैं, तो आप शादी के बिना भी जीवन जी सकते हैं।
जब ये सवाल श्रीश्री रविशंकर से पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि आपके लिए शादी करना जरूरी नहीं है।
शादी करने या न करने का निर्णय पूरी तरह आप पर निर्भर है।
भारत में अविवाहित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है
आज के युवा शादी में विश्वास नहीं रखते। विशेषकर वे लोग जो उच्च शिक्षित हैं। यह मुख्य रूप से बिगड़ते रिश्तों, मुद्रास्फीति और कभी-कभी आराम खोने के डर से जुड़े उदाहरणों के कारण है।नहीं, शादी करना ज़रूरी नहीं है
कानून, समाज या भगवान में से कोई भी ज़बरदस्ती शादी नहीं करवाता। ये एक पर्सनल चॉइस है.
शादी के 2 पहलू समझो
शादी ना करने के फायदे
1. आज़ादी: अपना समय, पैसा, करियर पर पूरा नियंत्रण। किसी को जवाब नहीं देना।
2. काम ज़िम्मेदारी: घर, बच्चे, सास-ससुर की ज़िम्मेदारियाँ नहीं।
3. करियर फोकस: अकेले लोग अक्सर पढ़ते हैं, बिजनेस या यात्रा पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
4. मानसिक शांति: अगर तुम्हें झगड़ा है, समझौता पसंद नहीं, तो सिंगल रहना बेहतर है।
शादी के फ़ायदे
1. साथी: बुरा समय हो या अच्छा, शेयर करने के लिए एक पार्टनर होता है।
2. भावनात्मक समर्थन: अकेला महसूस नहीं होता। बिमारी या मुश्किल में कोई साथ देता है।
3. परिवार और समाज:
भारत में अभी भी बहुत से परिवारों की शादी को "सेटल होना" माना जाता है।
4. वित्तीय और कानूनी: संपत्ति, बीमा, बच्चे के नाम में कानूनी आसानी होती है।
तो फैसला कैसे लो?
अपने आप से ये 3 सवाल पूछो:
1. क्यों करना चाहते हो? समाज का दबाव है, क्या तुम्हें सच में एक पार्टनर चाहिए?
2. अकेला रह पाओगे? 40-50 साल की उम्र में बिना पार्टनर के खुश रहोगे क्या?
3. समझौता कर पाओगे? शादी = एडजस्ट करना। एगो साइड रखना पड़ता है।
निष्कर्ष:
जिंदगी जीने के लिए शादी जरूरी नहीं है। सुखी रहने के लिए सही लोग, पैसा, स्वास्थ्य और उद्देश्य जरूरी है। वो शादी से भी मिल सकता है, और बिना शादी के भी।
